य एको जालवानीशत ईशनीभि:सर्वाॸ लोकानीशत ईशनीभि:।य एवैक उद्भवे सम्भवे चय एतद्विदुरमृतास्ते भवन्ति॥ १॥ य:=जो; एक:=एक; जालवान्=जगत् रूप जालका अधिपति; ईशनीभि:= अपनी स्वरूपभूत …
Blog
Svetasvatara Upanishad 2.17 Hindi
यो देवो अग्नौ यो अप्सुयो विश्वं भुवनमाविवेश।य ओषधीषु यो वनस्पतिषुतस्मै देवाय नमो नम:॥ १७॥ य:=जो; देव:=परमदेव परमात्मा; अग्नौ=अग्निमें है; य:=जो; अप्सु=जलमें …
Svetasvatara Upanishad 2.16 Hindi
एष ह देव: प्रदिशोऽनु सर्वा:पूर्वो ह जात: स उ गर्भे अन्त:।स एव जात: स जनिष्यमाण:प्रत्यङ् जनांस्तिष्ठति सर्वतोमुख:॥ १६॥ * * यह मन्त्र यजुर्वेद अध्याय ३२ का चौथा है। ह=निश्चय ही; एष:=यह (ऊपर …
Svetasvatara Upanishad 2.15 Hindi
यदाऽऽत्मतत्त्वेन तु ब्रह्मतत्त्वंदीपोपमेनेह युक्त: प्रपश्येत्।अजं ध्रुवं सर्वतत्त्वैर्विशुद्धंज्ञात्वा देवं मुच्यते सर्वपाशै:॥ १५॥ तु=उसके बाद; यदा=जब; युक्त:=वह …
Svetasvatara Upanishad 2.14 Hindi
यथैव विम्बं मृदयोपलिप्तंतेजोमयं भ्राजते तत् सुधान्तम्तद्वाऽऽत्मतत्त्वं प्रसमीक्ष्य देहीएक: कृतार्थो भवते वीतशोक:॥ १४॥ यथा=जिस प्रकार; मृदया=मिट्टीसे; उपलिप्तम्=लिप्त होकर मलिन …
Svetasvatara Upanishad 2.13 Hindi
लघुत्वमारोग्यमलोलुपत्वंवर्णप्रसादं स्वरसौष्ठवं च।गन्ध: शुभो मूत्रपुरीषमल्पंयोगप्रवृत्तिं प्रथमां वदन्ति॥ १३॥ लघुत्वम्=शरीरका हल्कापन; आरोग्यम्=किसी प्रकारके रोगका न …