अग्निर्यत्राभिमथ्यते वायुर्यत्राधिरुध्यते।सोमो यत्रातिरिच्यते तत्र संजायते मन:॥ ६॥ यत्र=जिस स्थितिमें; अग्नि:=परमात्मारूप अग्निको; (प्राप्त करनेके उद्देश्यसे) अभिमथ्यते=(ॐकारके जप और …
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Svetasvatara Upanishad 2.5 Hindi
युजे वां ब्रह्म पूर्व्यं नमोभि-र्वि श्लोक एतु पथ्येव सूरे:।शृण्वन्तु विश्वे अमृतस्य पुत्राआ ये धामानि दिव्यानि तस्थु:॥ ५॥ * * यह मन्त्र यजुर्वेद अध्याय ११का पाँचवाँ है और ऋग्वेद (१०। १३। १) में भी …
Svetasvatara Upanishad 2.4 Hindi
युञ्जते मन उत युञ्जते धियोविप्रा विप्रस्य बृहतो विपश्चित:।वि होत्रा दधे वयुनाविदेकइन्मही देवस्य सवितु: परिष्टुति:॥ ४॥ * * यह यजुर्वेद अध्याय ११का चौथा और अध्याय ५ का १४ वाँ मन्त्र है तथा ऋग्वेद (५। …
Svetasvatara Upanishad 2.3 Hindi
युक्त्वाय मनसा देवान् सुवर्यतो धिया दिवम्।बृहज्ज्योति: करिष्यत: सविता प्रसुवाति तान्॥ ३॥ * * ये मन्त्र यजुर्वेद अध्याय ११ का ३ है। सविता=सबको उत्पन्न करनेवाला परमेश्वर; सुव:=स्वर्गादि …
Svetasvatara Upanishad 2.2 Hindi
युक्तेन मनसा वयं देवस्य सवितु: सवे। सुवर्गेयाय शक्त्या॥ २॥ * * ये मन्त्र यजुर्वेद अध्याय ११ का २ है। वयम्=हमलोग; सवितु:=सबको उत्पन्न करनेवाले; देवस्य=परमदेव …
Svetasvatara Upanishad 2.1 Hindi
सम्बन्ध—पहले अध्यायमें परमदेव परमात्माके साक्षात्कारका प्रधान उपाय ध्यानको बताया गया। उस ध्यानकी प्रक्रिया बतानेके लिये दूसरा अध्याय आरम्भ किया जाता है। इसमें पहले ध्यानकी सिद्धिके लिये पाँच …