या ते रुद्र शिवा तनूरघोरापापकाशिनी।तया नस्तनुवा शन्तमया गिरिशन्ताभिचाकशीहि॥ ५॥ * * यह यजुर्वेद अध्याय १६का दूसरा मन्त्र है। रुद्र=हे रुद्रदेव!; ते=तेरी; या=जो; अघोरा=भयानकतासे …
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Svetasvatara Upanishad 3.4 Hindi
यो देवानां प्रभवश्चोद्भवश्चविश्वाधिपो रुद्रो महर्षि:।हिरण्यगर्भं जनयामास पूर्वंस नो बुद्धॺा शुभया संयुनक्तु॥ ४॥ य:=जो; रुद्र:=रुद्र; देवानाम्=इन्द्रादि देवताओंकी; प्रभव:=उत्पत्तिका …
Svetasvatara Upanishad 3.3 Hindi
विश्वतश्चक्षुरुत विश्वतोमुखोविश्वतोबाहुरुत विश्वतस्पात्।सं बाहुभ्यां धमति सं पतत्रै-र्द्यावाभूमी जनयन् देव एक:॥ ३॥ * * यजुर्वेद अध्याय १७का उन्नीसवाँ और (अथर्व० १३। २६) मन्त्र इसी प्रकार है तथा ऋ० …
Svetasvatara Upanishad 3.2 Hindi
एको हि रुद्रो न द्वितीयाय तस्थु-र्य इमाँल्लोकानीशत ईशनीभि:।प्रत्यङ् जनांस्तिष्ठति संचुकोचान्तकालेसंसृज्य विश्वा भुवनानि गोपा:॥ २॥ य:=जो; ईशनीभि:=अपनी स्वरूपभूत विविध …
Svetasvatara Upanishad 3.1 Hindi
य एको जालवानीशत ईशनीभि:सर्वाॸ लोकानीशत ईशनीभि:।य एवैक उद्भवे सम्भवे चय एतद्विदुरमृतास्ते भवन्ति॥ १॥ य:=जो; एक:=एक; जालवान्=जगत् रूप जालका अधिपति; ईशनीभि:= अपनी स्वरूपभूत …
Svetasvatara Upanishad 2.17 Hindi
यो देवो अग्नौ यो अप्सुयो विश्वं भुवनमाविवेश।य ओषधीषु यो वनस्पतिषुतस्मै देवाय नमो नम:॥ १७॥ य:=जो; देव:=परमदेव परमात्मा; अग्नौ=अग्निमें है; य:=जो; अप्सु=जलमें …