सम्बन्ध—प्रथम प्रकरणमें ब्रह्मका स्वरूप-तत्त्व समझानेके लिये उसकी शक्तिका सांकेतिक भाषामें विभिन्न प्रकारसे दिग्दर्शन कराया गया। द्वितीय प्रकरणमें ब्रह्मज्ञानकी विलक्षणता बतलानेके लिये यह कहा गया कि …
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Kena Upanishad 2.5 Hindi
इह चेदवेदीदथ सत्यमस्तिन चेदिहावेदीन्महती विनष्टि:।भूतेषु भूतेषु विचित्य धीरा:प्रेत्यास्माल्लोकादमृता भवन्ति॥ ५॥ चेत्=यदि; इह=इस मनुष्य-शरीरमें; अवेदीत्=(परब्रह्मको) जान लिया; अथ=तब …
Kena Upanishad 2.4 Hindi
प्रतिबोधविदितं मतममृतत्वं हि विन्दते।आत्मना विन्दते वीर्यं विद्यया विन्दतेऽमृतम्॥ ४॥ प्रतिबोधविदितम्=उपर्युक्त प्रतिबोध (संकेत) से उत्पन्न ज्ञान ही; मतम्=वास्तविक ज्ञान है; हि=क्योंकि …
Kena Upanishad 2.3 Hindi
यस्यामतं तस्य मतं मतं यस्य न वेद स:।अविज्ञातं विजानतां विज्ञातमविजानताम्॥ ३॥ यस्य अमतम्=जिसका यह मानना है कि ब्रह्म जाननेमें नहीं आता; तस्य=उसका; मतम्=(तो वह) जाना हुआ है; …
Kena Upanishad 2.2 Hindi
नाहं मन्ये सुवेदेति नो न वेदेति वेद च।यो नस्तद्वेद तद्वेद नो न वेदेति वेद च॥ २॥ अहम्=मैं; सुवेद=ब्रह्मको भलीभाँति जान गया हूँ; इति न मन्ये=यों नहीं मानता; (और) नो=न; इति=ऐसा (ही …
Kena Upanishad 2.1 Hindi
यदि मन्यसे सुवेदेति दभ्रमेवापिनूनं त्वं वेत्थ ब्रह्मणो रूपम्।यदस्य त्वं यदस्य देवेष्वथ नुमीमाॸस्यमेव ते मन्ये विदितम्॥ १॥ यदि=यदि; त्वम्=तू; इति=यह; मन्यसे=मानता है …