अथ वायुमब्रुवन् वायवेतद् विजानीहि किमेतद् यक्षमिति तथेति॥ ७॥ अथ=तब; वायुम्=वायुदेवतासे; अब्रुवन्=(देवताओंने) कहा; वायो=हे वायुदेव! (जाकर); एतत्=इस बातको; विजानीहि=आप …
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Kena Upanishad 3.6 Hindi
तस्मै तृणं निदधावेतद्दहेति। तदुपप्रेयाय सर्वजवेन तन्न शशाक दग्धुं स तत एव निववृते, नैतदशकं विज्ञातुं यदेतद् यक्षमिति॥ ६॥ (तब उस दिव्य यक्षने) तस्मै=उस अग्निदेवके सामने; तृणम्=एक …
Kena Upanishad 3.5 Hindi
तस्मिॸस्त्वयि किं वीर्यमिति। अपीदॸसर्वं दहेयम्, यदिदं पृथिव्यामिति॥ ५॥ तस्मिन् त्वयि=उक्त नामोंवाले तुझ अग्निमें; किं वीर्यम्=क्या सामर्थ्य है; इति=यह बता; (तब अग्निने यह उत्तर दिया …
Kena Upanishad 3.4 Hindi
तदभ्यद्रवत् तमभ्यवदत् कोऽसीत्यग्निर्वा अहमस्मीत्यब्रवीज्जातवेदा वा अहमस्मीति॥ ४॥ तत्=उसके समीप; (अग्निदेव) अभ्यद्रवत्=दौड़कर गया; तम्=उस अग्निदेवसे; अभ्यवदत्=(उस दिव्य यक्षने) …
Kena Upanishad 3.3 Hindi
तेऽग्निमब्रुवञ्जातवेद एतद् विजानीहि किमिदं यक्षमिति तथेति॥ ३॥ ते=उन इन्द्रादि देवताओंने; अग्निम्=अग्निदेवसे; [इति=इस प्रकार;] अब्रुवन्=कहा; जातवेद:=हे जातवेदा; (आप जाकर) एतत्=इस …
Kena Upanishad 3.2 Hindi
तद्धैषां विजज्ञौ तेभ्यो ह प्रादुर्बभूव तन्न व्यजानत किमिदं यक्षमिति॥ २॥ ह तत्=प्रसिद्ध है कि उस परब्रह्मने; एषाम्=इन देवताओंके (अभिमानको); विजज्ञौ=जान लिया; (और कृपापूर्वक उनका अभिमान …