नील: पतङ्गो हरितो लोहिताक्ष-स्तडिद्गर्भ ऋतव: समुद्रा:।अनादिमत्त्वं विभुत्वेन वर्तसेयतो जातानि भुवनानि विश्वा॥ ४॥ [त्वम् एव]=तू ही; नील:=नीलवर्ण; पतङ्ग:=पतङ्ग है; हरित:=हरे रंगका; …
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Svetasvatara Upanishad 4.3 Hindi
त्वं स्त्री त्वं पुमानसि त्वं कुमार उत वा कुमारी।त्वं जीर्णो दण्डेन वञ्चसि त्वं जातो भवसि विश्वतोमुख:॥ ३॥ * * यह अथर्ववेद काण्ड १० सूक्त ८ का २७ वाँ मन्त्र है। त्वम्=तू; स्त्री=स्त्री …
Svetasvatara Upanishad 4.2 Hindi
तदेवाग्निस्तदादित्यस्तद्वायुस्तदु चन्द्रमा:।तदेव शुक्रं तद्ब्रह्म तदापस्तत् प्रजापति:॥ २॥ * * यह मन्त्र यजुर्वेद ३२। १ में भी आया है। तत् एव=वही; अग्नि:=अग्नि है; तत् …
Svetasvatara Upanishad 4.1 Hindi
य एकोऽवर्णो बहुधा शक्तियोगाद्वर्णाननेकान् निहितार्थो दधाति।वि चैति चान्ते विश्वमादौ स देव:स नो बुद्धॺा शुभया संयुनक्तु॥ १॥ य:=जो; अवर्ण:=रंग, रूप आदिसे रहित होकर भी; निहितार्थ:=छिपे हुए …
Svetasvatara Upanishad 3.21 Hindi
वेदाहमेतमजरं पुराणंसर्वात्मानं सर्वगतं विभुत्वात्।जन्मनिरोधं प्रवदन्ति यस्यब्रह्मवादिनो हि प्रवदन्ति नित्यम्॥ २१॥ ब्रह्मवादिन:=वेदके रहस्यका वर्णन करनेवाले …
Svetasvatara Upanishad 3.20 Hindi
अणोरणीयान् महतो महीया-नात्मा गुहायां निहितोऽस्य जन्तो:।तमक्रतुं पश्यति वीतशोकोधातु: प्रसादान्महिमानमीशम्॥ २०॥ * * यह मन्त्र कठ उ० १। २। २० में भी है। अणो: अणीयान्=(वह) सूक्ष्मसे भी अति सूक्ष्म; …