वेदान्ते परमं गुह्यं पुराकल्पे प्रचोदितम्।नाप्रशान्ताय दातव्यं नापुत्रायाशिष्याय वा पुन:॥ २२॥ [इदम्]=यह; परमम्=परम; गुह्यम्=रहस्यमय ज्ञान; पुराकल्पे=पूर्वकल्पमें; वेदान्ते=वेदके …
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Svetasvatara Upanishad 6.21 Hindi
तप:प्रभावाद् देवप्रसादाच्च ब्रह्मह श्वेताश्वतरोऽथ विद्वान्।अत्याश्रमिभ्य: परमं पवित्रंप्रोवाच सम्यगृषिसङ्घजुष्टम्॥ २१॥ ह=यह प्रसिद्ध है कि; श्वेताश्वतर:=श्वेताश्वतर नामक …
Svetasvatara Upanishad 6.19-20 Hindi
निष्कलं निष्क्रियॸ शान्तं निरवद्यं निरञ्जनम्।अमृतस्य परॸ सेतुं दग्धेन्धनमिवानलम्॥ १९॥ निष्कलम्=कलाओंसे रहित; निष्क्रियम्=क्रियारहित; शान्तम्=सर्वथा …
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Svetasvatara Upanishad 6.18 Hindi
यो ब्रह्माणं विदधाति पूर्वंयो वै वेदांश्च प्रहिणोति तस्मै।तॸ ह देवमात्मबुद्धिप्रकाशंमुमुक्षुर्वै शरणमहं प्रपद्ये॥ १८॥ य:=जो परमेश्वर; वै=निश्चय ही; पूर्वम्=सबसे …
Svetasvatara Upanishad 6.17 Hindi
स तन्मयो ह्यमृत ईशसंस्थोज्ञ: सर्वगो भुवनस्यास्य गोप्ता।य ईशे अस्य जगतो नित्यमेवनान्यो हेतुर्विद्यत ईशनाय॥ १७॥ स: हि=वही; तन्मय:=तन्मय; अमृत:=अमृतस्वरूप; ईशसंस्थ:=ईश्वरों (लोकपालों) …
Svetasvatara Upanishad 6.16 Hindi
स विश्वकृद् विश्वविदात्मयोनि-र्ज्ञ: कालकालो गुणी सर्वविद् य:।प्रधानक्षेत्रज्ञपतिर्गुणेश:सॸसारमोक्षस्थितिबन्धहेतु:॥ १६॥ स:=वह; ज्ञ:=ज्ञानस्वरूप …