শৌনকো হ বৈ মহাশালোঽঙ্গিরসংবিধিবদুপসন্নঃ পপ্রচ্ছ।কস্মিন্নু ভগবো বিজ্ঞাতে সর্বমিদংবিজ্ঞাতং ভবতীতি॥৩ অন্বয়: মহাশালঃ (বিশিষ্ট গৃহস্থ); শৌনকঃ (শুনক পুত্র); হ বৈ (প্রসিদ্ধি অর্থে); বিধিবৎ (শাস্ত্র বিধি …
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Mundaka Upanishad 1.1.2
অথর্বণে যাং প্রবদেত ব্রহ্মাঽথর্বাতাং পুরোবাচাঙ্গিরে ব্রহ্মবিদ্যাম্।স ভারদ্বাজায় সত্যবহার প্রাহভারদ্বাজোঽঙ্গিরসে পরাবরাম্॥২ অন্বয়: ব্রহ্মা (ব্রহ্মা); যাম্ (যে ব্রহ্মবিদ্যা); অথর্বণে (অথর্বাকে); …
Mundaka Upanishad 1.1.1
ওঁ ব্রহ্মা দেবানাং প্রথমঃ সংবভূববিশ্বস্য কর্তা ভুবনস্য গোপ্তা।স ব্ৰহ্মবিদ্যাং সর্ববিদ্যাপ্রতিষ্ঠা-মথর্বায় জ্যেষ্ঠপুত্ৰায় প্ৰাহ॥১ অন্বয়: ব্রহ্মা (ব্রহ্মা); দেবানাম্ (দেবতাগণের মধ্যে); প্রথমঃ …
BG 9.11 अवजानन्ति मां मूढा
अवजानन्ति मां मूढा मानुषीं तनुमाश्रितम्।परं भावमजानन्तो मम भूतमहेश्वरम्॥ अवजानन्ति, माम्, मूढा:, मानुषीम्, तनुुम्, आश्रितम्,परम्, भावम्, अजानन्त:, मम, भूतमहेश्वरम्॥ ११॥ मम = मेरे, परम् = परम, …
BG 9.10 मयाध्यक्षेण प्रकृति:
मयाध्यक्षेण प्रकृति: सूयते सचराचरम्।हेतुनानेन कौन्तेय जगद्विपरिवर्तते॥ मया, अध्यक्षेण, प्रकृति:, सूयते, सचराचरम्,हेतुना, अनेन, कौन्तेय, जगत्, विपरिवर्तते॥ १०॥ कौन्तेय = हे अर्जुन!, मया = मुझ, …
BG 9.9 न च मां तानि कर्माणि
न च मां तानि कर्माणि निबध्नन्ति धनञ्जय।उदासीनवदासीनमसक्तं तेषु कर्मसु॥ न, च, माम्, तानि, कर्माणि, निबध्नन्ति, धनञ्जय,उदासीनवत्, आसीनम्, असक्तम्, तेषु, कर्मसु॥ ९॥ धनञ्जय = हे अर्जुन!, तेषु = …