सम्बन्ध—तृतीय वल्लीमें यह बतलाया गया कि वे परब्रह्म परमेश्वर सम्पूर्ण प्राणियोंमें वर्तमान हैं, परंतु सबको दीखते नहीं। कोई विरला ही उन्हें सूक्ष्म बुद्धिके द्वारा देख सकता है। इसपर यह प्रश्न होता है …
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Katha Upanishad 1.3.17 Hindi
य इमं परमं गुह्यं श्रावयेद् ब्रह्मसंसदि।प्रयत: श्राद्धकाले वा तदानन्त्याय कल्पते।तदानन्त्याय कल्पत इति॥ १७॥ य:=जो मनुष्य; प्रयत:=सर्वथा शुद्ध होकर; इमम्=इस; परमम् गुह्यम्=परम …
Katha Upanishad 1.3.16 Hindi
नाचिकेतमुपाख्यानं मृत्युप्रोक्तॸ सनातनम्।उक्त्वा श्रुत्वा च मेधावी ब्रह्मलोके महीयते॥ १६॥ मेधावी=बुद्धिमान् मनुष्य; मृत्युप्रोक्तम्=यमराजके द्वारा कहे …
Katha Upanishad 1.3.15 Hindi
अशब्दमस्पर्शमरूपमव्ययंतथारसं नित्यमगन्धवच्च यत्।अनाद्यनन्तं महत: परं ध्रुवंनिचाय्य तन्मृत्युमुखात् प्रमुच्यते॥ १५॥ यत् …
Katha Upanishad 1.3.14 Hindi
उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत।क्षुरस्य धारा निशिता दुरत्यया दुर्गं पथस्तत्कवयो वदन्ति॥ १४॥ उत्तिष्ठत=(हे मनुष्यो!) उठो; जाग्रत=जागो (सावधान हो जाओ और); वरान् प्राप्य=श्रेष्ठ …
Katha Upanishad 1.3.13 Hindi
यच्छेद्वाङ्मनसी प्राज्ञस्तद्यच्छेज्ज्ञान आत्मनि।ज्ञानमात्मनि महति नियच्छेत्तद्यच्छेच्छान्त आत्मनि॥ १३॥ प्राज्ञ:=बुद्धिमान् साधकको चाहिये कि; वाक्=(पहले) वाक् आदि (समस्त इन्द्रियों) …