नाचिकेतमुपाख्यानं मृत्युप्रोक्तॸ सनातनम्।
उक्त्वा श्रुत्वा च मेधावी ब्रह्मलोके महीयते॥ १६॥
मेधावी=बुद्धिमान् मनुष्य; मृत्युप्रोक्तम्=यमराजके द्वारा कहे हुए; नाचिकेतम्=नचिकेताके; सनातनम्=(इस) सनातन; उपाख्यानम्=उपाख्यानका; उक्त्वा=वर्णन करके; च=और; श्रुत्वा=श्रवण करके; ब्रह्मलोके=ब्रह्मलोकमें; महीयते=महिमान्वित होता है (प्रतिष्ठित होता है)॥ १६॥
व्याख्या—यह जो इस अध्यायमें नचिकेताके प्रति यमराजका उपदेश है, यह कोई नयी बात नहीं है; यह परम्परागत सनातन उपाख्यान है। बुद्धिमान् मनुष्य इसका वर्णन और श्रवण करके ब्रह्मलोकमें प्रतिष्ठावाला होता है॥ १६॥