वेदाहमेतं पुरुषं महान्त-मादित्यवर्णं तमस: परस्तात्।तमेव विदित्वाति मृत्युमेतिनान्य: पन्था विद्यतेऽयनाय॥ ८॥ * * यह यजुर्वेद अध्याय ३१का अठारहवाँ मन्त्र है। तमस: परस्तात् =अविद्यारूप अन्धकारसे …
Blog
Svetasvatara Upanishad 3.7 Hindi
तत: परं ब्रह्मपरं बृहन्तंयथानिकायं सर्वभूतेषु गूढम्।विश्वस्यैकं परिवेष्टितार-मीशं तं ज्ञात्वामृता भवन्ति॥ ७॥ तत:=पूर्वोक्त जीव-समुदायरूप जगत् के; परम्=परे; …
Svetasvatara Upanishad 3.6 Hindi
यामिषुं गिरिशन्त हस्ते बिभर्ष्यस्तवे।शिवां गिरित्र तां कुरु मा हिॸसी: पुरुषं जगत्॥ ६॥ * * यह यजुर्वेद अध्याय १६का तीसरा मन्त्र है। गिरिशन्त=हे …
Svetasvatara Upanishad 3.5 Hindi
या ते रुद्र शिवा तनूरघोरापापकाशिनी।तया नस्तनुवा शन्तमया गिरिशन्ताभिचाकशीहि॥ ५॥ * * यह यजुर्वेद अध्याय १६का दूसरा मन्त्र है। रुद्र=हे रुद्रदेव!; ते=तेरी; या=जो; अघोरा=भयानकतासे …
Svetasvatara Upanishad 3.4 Hindi
यो देवानां प्रभवश्चोद्भवश्चविश्वाधिपो रुद्रो महर्षि:।हिरण्यगर्भं जनयामास पूर्वंस नो बुद्धॺा शुभया संयुनक्तु॥ ४॥ य:=जो; रुद्र:=रुद्र; देवानाम्=इन्द्रादि देवताओंकी; प्रभव:=उत्पत्तिका …
Svetasvatara Upanishad 3.3 Hindi
विश्वतश्चक्षुरुत विश्वतोमुखोविश्वतोबाहुरुत विश्वतस्पात्।सं बाहुभ्यां धमति सं पतत्रै-र्द्यावाभूमी जनयन् देव एक:॥ ३॥ * * यजुर्वेद अध्याय १७का उन्नीसवाँ और (अथर्व० १३। २६) मन्त्र इसी प्रकार है तथा ऋ० …