भक्त भगवान्का अत्यन्त प्यारा होता है; क्योंकि वह शरीर-इन्द्रियाँ-मन-बुद्धिसहित अपने-आपको भगवान्के अर्पण कर देता है। जो परम श्रद्धापूर्वक अपने मनको भगवान्में लगाते हैं, वे भक्त सर्वश्रेष्ठ हैं। …
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Bhagavad Gita Chapter 11 Overview
अर्जुनने भगवान्की कृपासे जिस दिव्य विश्वरूपके दर्शन किये, उसको तो हरेक मनुष्य नहीं देख सकता; परन्तु आदि-अवताररूपसे प्रकट हुए इस संसारको श्रद्धापूर्वक भगवान्का रूप मानकर तो हरेक मनुष्य विश्वरूपके दर्शन …
Bhagavad Gita Chapter 7 Overview
सब कुछ वासुदेव ही है, भगवद्रूप ही है- इसका मनुष्यको अनुभव कर लेना चाहिये। सूतके मणियोंसे बनी हुई मालामें सूतकी तरह भगवान् ही सब संसारमें ओत-प्रोत हैं। पृथ्वी, जल, तेज आदि तत्त्वोंमें; चन्द्र, सूर्य …
Bhagavad Gita Chapter 3 Overview
इस मनुष्यलोकमें सभीको निष्कामभावपूर्वक अपने कर्तव्यका तत्परतासे पालन करना चाहिये, चाहे वह ज्ञानी हो या अज्ञानी हो, चाहे वह भगवान्का अवतार ही क्यों न हो! कारण कि सृष्टिचक्र अपने-अपने कर्तव्यका पालन …
Bhagavad Gita Chapter 2 Overview
अपने विवेकको महत्त्व देना और अपने कर्तव्यका पालन करना- इन दोनों उपायोंमेंसे किसी भी एक उपायको मनुष्य दृढ़तासे काममें लाये तो शोक-चिन्ता मिट जाते हैं। जितने शरीर दीखते हैं, वे सभी नष्ट होनेवाले हैं, …
Dhammapada, Verse 126 – The Story of Venerable Tissa
Pali text, illustration and English translation of Dhammapada verse 126: gabbham eke papajjanti nirayaṃ pāpakammino |saggaṃ sugatino yanti parinibbanti anāsavā || 126 || 126. Some find …
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