त एतदेव रूपमभिसंविशन्त्येतस्माद्रूपादुद्यन्ति ॥ ३.६.२ ॥ ta etadeva rūpamabhisaṃviśantyetasmādrūpādudyanti || 3.6.2 || 2. They enter into this [red] colour [of the sun], and they also come out of …
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Bhagavad Gita Chapter 15 Overview
इस संसारका मूल आधार और इस संसारमें अत्यन्त श्रेष्ठ परमपुरुष एक परमात्मा ही है-इसको दृढ़तापूर्वक मान लेनेसे मनुष्य सर्ववित् हो जाता है, कृतकृत्य हो जाता है। जिससे यह संसार अनादिकालसे चला आ रहा है और …
Bhagavad Gita Chapter 13 Overview
संसारमें एक परमात्मतत्त्व ही जाननेयोग्य है। उसको जरूर जान लेना चाहिये। उसको तत्त्वसे जाननेपर जाननेवालेकी परमात्मतत्त्वके साथ अभिन्नता हो जाती है। जिस परमात्माको जाननेसे अमरताकी प्राप्ति हो जाती है, …
Bhagavad Gita Chapter 12 Overview
भक्त भगवान्का अत्यन्त प्यारा होता है; क्योंकि वह शरीर-इन्द्रियाँ-मन-बुद्धिसहित अपने-आपको भगवान्के अर्पण कर देता है। जो परम श्रद्धापूर्वक अपने मनको भगवान्में लगाते हैं, वे भक्त सर्वश्रेष्ठ हैं। …
Bhagavad Gita Chapter 11 Overview
अर्जुनने भगवान्की कृपासे जिस दिव्य विश्वरूपके दर्शन किये, उसको तो हरेक मनुष्य नहीं देख सकता; परन्तु आदि-अवताररूपसे प्रकट हुए इस संसारको श्रद्धापूर्वक भगवान्का रूप मानकर तो हरेक मनुष्य विश्वरूपके दर्शन …
Bhagavad Gita Chapter 7 Overview
सब कुछ वासुदेव ही है, भगवद्रूप ही है- इसका मनुष्यको अनुभव कर लेना चाहिये। सूतके मणियोंसे बनी हुई मालामें सूतकी तरह भगवान् ही सब संसारमें ओत-प्रोत हैं। पृथ्वी, जल, तेज आदि तत्त्वोंमें; चन्द्र, सूर्य …