ওঁ সুকেশা চ ভারদ্বাজঃ শৈব্যশ্চ সত্যকামঃ সৌর্যায়ণী চ গার্গ্যঃকৌসল্যশ্চাশ্বশায়নো ভার্গবো বৈদর্ভিঃ কবন্ধী কাত্যায়নস্তে হৈতেব্রহ্মপরা ব্রহ্মনিষ্ঠাঃ পরং ব্রহ্মান্বেষমাণা এষ হ বৈ তৎ সর্বং বক্ষ্যতীতিতে হ …
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প্রশ্ন উপনিষদ
প্রথম প্রশ্ন 1.1 ভরদ্বাজপুত্র সুকেশা, শিবিপুত্র সত্যকাম, গর্গগোত্রীয় সৌর্যায়ণী অশ্বলপুত্র কৌসল্য, বিদর্ভদেশীয় ভৃগুপুত্র ভার্গব, কত্যতনয় কবন্ধী—এঁরা সকলেই ছিলেন ব্রহ্মে সমর্পিত প্রাণ। ব্রহ্ম …
BG 6.13-14 समं कायशिरोग्रीवं
समं कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिर:।सम्प्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं दिशश्चानवलोकयन्॥प्रशान्तात्मा विगतभीर्-ब्रह्मचारिव्रते स्थित:।मन: संयम्य मच्चित्तो युक्त आसीत मत्पर:॥ समम्, कायशिरोग्रीवम्, …
BG 6.11-12 शुचौ देशे प्रतिष्ठाप्य
शुचौ देशे प्रतिष्ठाप्य स्थिरमासनमात्मन:।नात्युच्छ्रितं नातिनीचं चैलाजिनकुशोत्तरम्॥तत्रैकाग्रं मन: कृत्वा यतचित्तेन्द्रियक्रिय:।उपविश्यासने युञ्ज्याद् योगमात्मविशुद्धये॥ शुचौ, देशे, …
BG 6.10 योगी युञ्जीत सततमात्मानं
योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थित:।एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रह:॥ योगी, युञ्जीत, सततम्, आत्मानम्, रहसि, स्थित:,एकाकी, यतचित्तात्मा, निराशी:, अपरिग्रह:॥ १०॥ यतचित्तात्मा = मन और …
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BG 6.9 सुहृन्मित्रार्युदासीन
सुहृन्मित्रार्युदासीनमध्यस्थद्वेष्यबन्धुषु।साधुष्वपि च पापेषु समबुद्धिर्विशिष्यते॥ सुहृन्मित्रार्युदासीनमध्यस्थद्वेष्यबन्धुषु,साधुषु, अपि, च, पापेषु, समबुद्धि:, विशिष्यते॥ …