Sri Ramakrishna passed away on 16 August 1886. A devotee brought the sad news to Girish, but Girish would not believe it. He said to the man: “This is a lie. The Master cannot die.” “Sir, I have …
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মানুষের যথার্থ স্বরূপ (১) – স্বামী বিবেকানন্দ
[লণ্ডনে প্রদত্ত বক্তৃতা] মানুষ এই পঞ্চেন্দ্রিয়গ্রাহ্য জগতে এতটা আসক্ত যে, সহজে সে উহা ছাড়িতে চাহে না। কিন্তু এই বাহ্য জগতকে যতদূর সত্য বা সার বলিয়া বোধ হউক না কেন, প্রত্যেক ব্যক্তি এবং প্রত্যেক …
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मनुष्य का वास्तविक और प्रातिभासिक स्वरूप – स्वामी विवेकानंद
हम यहाँ खड़े है, परन्तु हमारी दृष्टि दूर बहुत दूर, और कभी-कभी तो, कोसों दूर चली जाती है। जब से मनुष्य ने विचार करना आरम्भ किया, तभी से वह ऐसा करता आ रहा है। मनुष्य सदैव आगे और दूर देखने का प्रयत्न …
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आत्मा : उसके बन्धन तथा मुक्ति – स्वामी विवेकानंद
अद्वैत दर्शन के अनुसार विश्व में केवल एक ही वस्तु सत्य है, और वह है ब्रह्म। ब्रह्मेतर समस्त वस्तुएँ मिथ्या है, ब्रह्म ही उन्हें माया के योग से बनाता एवं अभिव्यक्त करता है। उस ब्रह्म की पुनःप्राप्ति ही …
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आत्मा – स्वामी विवेकानंद
तुममें से बहुतों ने मैक्समूलर की सुप्रसिद्ध पुस्तक ‘वेदान्त दर्शन पर तीन व्याख्यान’ (Three Lectures on the Vedanta Philosophy) को पड़ा होगा और शायद कुछ लोगों ने इसी विषय पर प्रोफेसर डॉयसन की जर्मन …
अमरत्व – स्वामी विवेकानंद
जीवात्मा के अमरत्व के प्रश्न के सिवा अन्य कौन-सा प्रश्न अधिक बार पूछा गया है, अन्य किस तत्त्व के रहस्य का उद्घाटन करने के लिए मनुष्य ने सारे जगत् की इतनी अधिक खोज की है, अन्य कौन-सा प्रश्न मानव-हृदय …