तस्मिॸस्त्वयि किं वीर्यमिति। अपीदॸसर्वं दहेयम्, यदिदं पृथिव्यामिति॥ ५॥ तस्मिन् त्वयि=उक्त नामोंवाले तुझ अग्निमें; किं वीर्यम्=क्या सामर्थ्य है; इति=यह बता; (तब अग्निने यह उत्तर दिया …
Blog
Kena Upanishad 3.4 Hindi
तदभ्यद्रवत् तमभ्यवदत् कोऽसीत्यग्निर्वा अहमस्मीत्यब्रवीज्जातवेदा वा अहमस्मीति॥ ४॥ तत्=उसके समीप; (अग्निदेव) अभ्यद्रवत्=दौड़कर गया; तम्=उस अग्निदेवसे; अभ्यवदत्=(उस दिव्य यक्षने) …
Kena Upanishad 3.3 Hindi
तेऽग्निमब्रुवञ्जातवेद एतद् विजानीहि किमिदं यक्षमिति तथेति॥ ३॥ ते=उन इन्द्रादि देवताओंने; अग्निम्=अग्निदेवसे; [इति=इस प्रकार;] अब्रुवन्=कहा; जातवेद:=हे जातवेदा; (आप जाकर) एतत्=इस …
Kena Upanishad 3.2 Hindi
तद्धैषां विजज्ञौ तेभ्यो ह प्रादुर्बभूव तन्न व्यजानत किमिदं यक्षमिति॥ २॥ ह तत्=प्रसिद्ध है कि उस परब्रह्मने; एषाम्=इन देवताओंके (अभिमानको); विजज्ञौ=जान लिया; (और कृपापूर्वक उनका अभिमान …
Kena Upanishad 3.1 Hindi
सम्बन्ध—प्रथम प्रकरणमें ब्रह्मका स्वरूप-तत्त्व समझानेके लिये उसकी शक्तिका सांकेतिक भाषामें विभिन्न प्रकारसे दिग्दर्शन कराया गया। द्वितीय प्रकरणमें ब्रह्मज्ञानकी विलक्षणता बतलानेके लिये यह कहा गया कि …
Kena Upanishad 2.5 Hindi
इह चेदवेदीदथ सत्यमस्तिन चेदिहावेदीन्महती विनष्टि:।भूतेषु भूतेषु विचित्य धीरा:प्रेत्यास्माल्लोकादमृता भवन्ति॥ ५॥ चेत्=यदि; इह=इस मनुष्य-शरीरमें; अवेदीत्=(परब्रह्मको) जान लिया; अथ=तब …