स प्राणमसृजत प्राणाच्छ्रद्धां खं वायुर्ज्योतिराप: पृथिवीन्द्रियं मनोऽन्नमन्नाद्वीर्यं तपो मन्त्रा: कर्म लोका लोकेषु च नाम च॥ ४॥
(यह सोचकर सबसे पहले) स:=उसने; प्राणम् असृजत=प्राणकी रचना की; प्राणात् श्रद्धाम्=प्राणके बाद श्रद्धाको (उत्पन्न किया); खम् वायु: ज्योति: आप: पृथिवी=(उसके बाद क्रमश:) आकाश, वायु, तेज, जल और पृथ्वी (ये पाँच महाभूत प्रकट हुए; फिर); मन: इन्द्रियम्=मन (अन्त:करण) और इन्द्रियसमुदाय (की उत्पत्ति हुई); अन्नम्=(उसके बाद) अन्न हुआ; अन्नात् =अन्नसे; वीर्यम्=वीर्य (की रचना हुई, फिर); तप:=तप; मन्त्रा:=नाना प्रकारके मन्त्र; कर्म=नाना प्रकारके कर्म; च लोका:=और उनके फलरूप भिन्न-भिन्न लोकों-(का निर्माण हुआ); च=और; लोकेषु=उन लोकोंमें; नाम=नाम (की रचना हुई)॥ ४॥
व्याख्या—परब्रह्म परमेश्वरने सर्वप्रथम सबके प्राणरूप सर्वात्मा हिरण्यगर्भको बनाया। उसके बाद शुभकर्ममें प्रवृत्त करानेवाली श्रद्धा अर्थात् आस्तिक बुद्धिको प्रकट करके फिर क्रमश: शरीरके उपादानभूत आकाश, वायु, तेज, जल और पृथ्वी—इन पाँच महाभूतोंकी सृष्टि की। इन पाँच महाभूतोंका कार्य ही यह दृश्यमान सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड है। पाँच महाभूतोंके बाद परमेश्वरने मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार—इन चारोंके समुदायरूप अन्त:करणको रचा। फिर विषयोंके ज्ञान एवं कर्मके लिये पाँच ज्ञानेन्द्रियों तथा पाँच कर्मेन्द्रियोंको उत्पन्न किया, फिर प्राणियोंके शरीरकी स्थितिके लिये अन्नकी और अन्नके परिपाकद्वारा बलकी सृष्टि की। उसके बाद अन्त:करण और इन्द्रियोंके संयमरूप तपका प्रादुर्भाव किया। उपासनाके लिये भिन्न-भिन्न मन्त्रोंकी कल्पना की। अन्त:करणके संयोगसे इन्द्रियोंद्वारा किये जानेवाले कर्मोंका निर्माण किया। उनके भिन्न-भिन्न फलरूप लोकोंको बनाया और उन सबके नाम-रूपोंकी रचना की। इस प्रकार सोलह कलाओंसे युक्त इस ब्रह्माण्डकी रचना करके जीवात्माके सहित परमेश्वर स्वयं इसमें प्रविष्ट हो गये; इसीलिये वे सोलह कलाओंवाले पुरुष कहलाते हैं। हमारा यह मनुष्यशरीर भी ब्रह्माण्डका ही एक छोटा-सा नमूना है, अत: परमेश्वर जिस प्रकार इस सारे ब्रह्माण्डमें हैं, उसी प्रकार हमारे इस शरीरमें भी हैं और इस शरीरमें भी वे सोलह कलाएँ वर्तमान हैं। उन हृदयस्थ परमदेव पुरुषोत्तमको जान लेना ही उस सोलह कलावाले पुरुषको जान लेना है॥ ४॥
सम्बन्ध—सर्गके आरम्भका वर्णन करके जिन परब्रह्मका लक्ष्य कराया गया, उन्हींका अब प्रलयके वर्णनसे लक्ष्य कराते हैं—