यथा नद्य: स्यन्दमाना: समुद्रे-
ऽस्तं गच्छन्ति नामरूपे विहाय।
तथा विद्वान् नामरूपाद् विमुक्त:
परात्परं पुरुषमुपैति दिव्यम्॥ ८॥
यथा=जिस प्रकार; स्यन्दमाना:=बहती हुई; नद्य:=नदियाँ, नामरूपे=नाम-रूपको; विहाय=छोड़कर; समुद्रे=समुद्रमें; अस्तम् गच्छन्ति=विलीन हो जाती हैं; तथा=वैसे ही; विद्वान्=ज्ञानी महात्मा; नामरूपात् =नाम-रूपसे; विमुक्त:=रहित होकर; परात् परम्=उत्तम-से-उत्तम; दिव्यम्=दिव्य; पुरुषम्=परम पुरुष परमात्माको; उपैति=प्राप्त हो जाता है॥ ८॥
व्याख्या—जिस प्रकार बहती हुई नदियाँ अपना-अपना नाम-रूप छोड़कर समुद्रमें विलीन हो जाती हैं, वैसे ही ज्ञानी महापुरुष नाम-रूपसे रहित होकर परात्पर दिव्य पुरुष परब्रह्म परमात्माको प्राप्त हो जाता है— सर्वतोभावसे उन्हींमें विलीन हो जाता है॥ ८॥