कर्मयोग – स्वामी विवेकानन्द Posted on July 12, 2007 by VivekaVani कर्म का चरित्र पर प्रभाव अपने-अपने कार्यक्षेत्र में सब बड़े हैं कर्मरहस्य कर्तव्य क्या है परोपकार में हमारा ही उपकार है अनासक्ति ही पूर्ण आत्मत्याग है मुक्ति कर्मयोग का आदर्श