तस्मिॸस्त्वयि किं वीर्यमिति? अपीदॸसर्वमाददीयम्, यदिदं पृथिव्यामिति॥ ९॥
तस्मिन् त्वयि=उक्त नामोंवाले तुझ वायुमें; किं वीर्यम्=क्या सामर्थ्य है; इति=यह बता; (तब वायुने यह उत्तर दिया कि) अपि=यदि (मैं चाहूँ तो); पृथिव्याम्=पृथ्वीमें; यत् इदम्=यह जो कुछ भी है; इदम् सर्वम्=इस सबको; आददीयम् इति=उठा लूँ—आकाशमें उड़ा दूँ॥ ९॥
व्याख्या—वायुकी भी वैसी ही गर्वोक्ति सुनकर ब्रह्मने इनसे भी वैसे ही अनजानकी भाँति कहा—‘अच्छा! आप वायुदेवता हैं और मातरिश्वा— अन्तरिक्षमें बिना ही आधारके विचरण करनेवाले भी आप ही हैं? बड़ी अच्छी बात है! पर यह तो बताइये कि आपमें क्या शक्ति है—आप क्या कर सकते हैं? इसपर वायुने भी अग्निकी भाँति पुन: सगर्व उत्तर दिया कि ‘मैं चाहूँ तो इस सारे भूमण्डलमें जो कुछ भी देखनेमें आ रहा है, सबको बिना आधारके उठा लूँ—उड़ा दूँ’॥ ९॥