शतायुष: पुत्रपौत्रान् वृणीष्व
बहून् पशून् हस्तिहिरण्यमश्वान्।
भूमेर्महदायतनं वृणीष्व
स्वयं च जीव शरदो यावदिच्छसि॥ २३॥
शतायुष:=सैकड़ों वर्षोंकी आयुवाले; पुत्रपौत्रान्=बेटे और पोतोंको (तथा); बहून् पशून्=बहुत-से गौ आदि पशुओंको (एवं); हस्तिहिरण्यम्=हाथी, सुवर्ण और; अश्वान् वृणीष्व=घोड़ोंको माँग लो; भूमे: महत् आयतनम्=भूमिके बड़े विस्तारवाले मण्डल (साम्राज्य) को; वृणीष्व=माँग लो; स्वयम् च=तुम स्वयं भी; यावत् शरद:=जितने वर्षोंतक; इच्छसि=चाहो; जीव=जीते रहो॥ २३॥
व्याख्या—नचिकेता! तुम बड़े भोले हो, क्या करोगे इस वरको लेकर? तुम ग्रहण करो इन सुखकी विशाल सामग्रियोंको। इस सौ-सौ वर्ष जीनेवाले पुत्र-पौत्रादि बड़े परिवारको माँग लो। गौ आदि बहुत-से उपयोगी पशु, हाथी, सुवर्ण, घोड़े और विशाल भूमण्डलके महान् साम्राज्यको माँग लो और इन सबको भोगनेके लिये जितने वर्षोंतक जीनेकी इच्छा हो, उतने ही वर्षोंतक जीते रहो॥ २३॥