एष तेऽग्निर्नचिकेत: स्वर्ग्यो
यमवृणीथा द्वितीयेन वरेण।
एतमग्निं तवैव प्रवक्ष्यन्ति जनास-
स्तृतीयं वरं नचिकेतो वृणीष्व॥ १९॥
नचिकेत:=हे नचिकेता; एष: ते=यह तुम्हें बतलायी हुई; स्वर्ग्य: अग्नि:=स्वर्ग प्रदान करनेवाली अग्निविद्या है; यम् द्वितीयेन वरेण अवृणीथा:=जिसको तुमने दूसरे वरसे माँगा था; एतम् अग्निम्=इस अग्निको (अबसे); जनास:=लोग; तव एव=तुम्हारे ही नामसे; प्रवक्ष्यन्ति=कहा करेंगे; नचिकेत:=हे नचिकेता; तृतीयम् वरम् वृणीष्व=(अब तुम) तीसरा वर माँगो॥ १९॥
व्याख्या—यमराज कहते हैं—नचिकेता! तुम्हें यह उसी स्वर्गकी साधनरूपा अग्निविद्याका उपदेश दिया गया है, जिसके लिये तुमने दूसरे वरमें याचना की थी। अबसे लोग तुम्हारे ही नामसे इस अग्निको पुकारा करेंगे। नचिकेता! अब तुम तीसरा वर माँगो॥ १९॥
सम्बन्ध—नचिकेता तीसरा वर माँगता है—