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BG 5.25 लभन्ते ब्रह्मनिर्वाण
लभन्ते ब्रह्मनिर्वाणमृषयः क्षीणकल्मषाः ।छिन्नद्वैधा यतात्मानः सर्वभूतहिते रताः ॥25॥ लभन्ते, ब्रह्मनिर्वाणम्, ऋषय:, क्षीणकल्मषा:,छिन्नद्वैधा:, यतात्मान:, सर्वभूतहिते, रता:॥ …
Vivekachudamani of Adi Shankaracharya
मंगलाचरण – 1. जो मन-बुद्धि के अतीत होकर भी, वेदान्त के समस्त सिद्धान्तों के विषय हैं, उन परम आनन्दमय (ब्रह्म-स्वरूप) सद्गुरु श्री गोविन्द को मैं प्रणाम करता हूँ । मुक्ति तथा उसके साधनों की …
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BG 5.14 न कर्तृत्वं न कर्माणि
न कर्तृत्वं न कर्माणि लोकस्य सृजति प्रभुः ।न कर्मफलसंयोगं स्वभावस्तु प्रवर्तते ॥ 14॥ न, कर्तृत्वम्, न, कर्माणि, लोकस्य, सृजति, प्रभु:,न, कर्मफलसंयोगम्, स्वभाव:, तु, प्रवर्तते॥ …
Atmabodh by Adi Sankaracharya
1. तपों के अभ्यास द्वारा जिन लोगों के पाप क्षीण हो गये है, जिनके चित्त शान्त और राग-द्वेष या आसक्तियों से रहित हो गये हैं, ऐसे मोक्ष प्राप्ति की तीव्र इच्छा रखनेवाले साधकों के लिए ‘आत्मबोध’ नामक इस …
BG 5.17 तद्बुद्धयस्तदात्मानस्
तद्बुद्धयस्तदात्मानस्तन्निष्ठास्तत्परायणाः ।गच्छन्त्यपुनरावृत्तिं ज्ञाननिर्धूतकल्मषाः ॥17॥ तद्बुद्धय:, तदात्मान:, तन्निष्ठा:, तत्परायणा:,गच्छन्ति, अपुनरावृत्तिम्, ज्ञाननिर्धूतकल्मषा:॥ …