एको देव: सर्वभूतेषु गूढ:
सर्वव्यापी सर्वभूतान्तरात्मा।
कर्माध्यक्ष: सर्वभूताधिवास:
साक्षी चेता केवलो निर्गुणश्च॥ ११॥
एक:=(वह) एक; देव:=देव ही; सर्वभूतेषु=सब प्राणियोंमें; गूढ:=छिपा हुआ; सर्वव्यापी=सर्वव्यापी; (और) सर्वभूतान्तरात्मा=समस्त प्राणियोंका अन्तर्यामी परमात्मा है; कर्माध्यक्ष:=(वही) सबके कर्मोंका अधिष्ठाता; सर्वभूताधिवास:=सम्पूर्ण भूतोंका निवासस्थान; साक्षी=सबका साक्षी; चेता=चेतनस्वरूप [और सबको चेतना प्रदान करनेवाला]; केवल:=सर्वथा विशुद्ध; (और) निर्गुण: च=गुणातीत भी है॥ ११॥
व्याख्या—वे एक ही परमदेव परमेश्वर समस्त प्राणियोंके हृदयरूप गुहामें छिपे हुए हैं, वे सर्वव्यापी और समस्त प्राणियोंके अन्तर्यामी परमात्मा हैं। वे ही सबके कर्मोंके अधिष्ठाता—उनको कर्मानुसार फल देनेवाले और समस्त प्राणियोंके निवासस्थान—आश्रय हैं; तथा वे ही सबके साक्षी—शुभाशुभ कर्मको देखनेवाले, परम चेतनस्वरूप तथा सबको चेतना प्रदान करनेवाले, सर्वथा विशुद्ध अर्थात् निर्लेप और प्रकृतिके गुणोंसे अतीत भी हैं॥ ११॥