यो देवानां प्रभवश्चोद्भवश्च
विश्वाधिपो रुद्रो महर्षि:।
हिरण्यगर्भं जनयामास पूर्वं
स नो बुद्धॺा शुभया संयुनक्तु॥ ४॥
य:=जो; रुद्र:=रुद्र; देवानाम्=इन्द्रादि देवताओंकी; प्रभव:=उत्पत्तिका हेतु; च=और; उद्भव:=वृद्धिका हेतु है; च=तथा; (जो) विश्वाधिप:=सबका अधिपति; (और) महर्षि:=महान् ज्ञानी (सर्वज्ञ) है; पूर्वम्=(जिसने) पहले; हिरण्यगर्भम्=हिरण्यगर्भको; जनयामास=उत्पन्न किया था; स:=वह परमदेव परमेश्वर; न:=हमलोगोंको; शुभया बुद्धॺा=शुभ बुद्धिसे; संयुनक्तु=संयुक्त करें॥ ४॥
व्याख्या—सबको अपने शासनमें रखनेवाले जो रुद्ररूप परमेश्वर इन्द्रादि समस्त देवताओंको उत्पन्न करते और बढ़ाते हैं तथा जो सबके अधिपति और महान् ज्ञानी—सर्वज्ञ हैं, जिन्होंने सृष्टिके आदिमें हिरण्यगर्भको उत्पन्न किया था, वे परमदेव परमात्मा हमलोगोंको शुभ बुद्धिसे संयुक्त करें॥ ४॥