आत्मानॸ रथिनं विद्धि शरीरॸ रथमेव तु।
बुद्धिं तु सारथिं विद्धि मन: प्रग्रहमेव च॥ ३॥
आत्मानम्=(हे नचिकेता! तुम) जीवात्माको तो; रथिनम्=रथका स्वामी (उसमें बैठकर चलनेवाला); विद्धि=समझो; तु=और; शरीरम् एव=शरीरको ही; रथम्=रथ (समझो); तु बुद्धिम्=तथा बुद्धिको; सारथिम्=सारथि (रथको चलानेवाला); विद्धि=समझो; च मन: एव=और मनको ही; प्रग्रहम्=लगाम (समझो)॥ ३॥
(See Next Verse for Commentary)