एतत्तुल्यं यदि मन्यसे वरं
वृणीष्व वित्तं चिरजीविकां च।
महाभूमौ नचिकेतस्त्वमेधि
कामानां त्वा कामभाजं करोमि॥ २४॥
नचिकेत:=हे नचिकेता; वित्तम् चिरजीविकाम्=धन, सम्पत्ति और अनन्तकालतक जीनेके साधनोंको; यदि त्वम्=यदि तुम; एतत्तुल्यम्=इस आत्मज्ञानविषयक वरदानके समान; वरम् मन्यसे वृणीष्व=वर मानते हो तो माँग लो; च महाभूमौ=और तुम इस पृथ्वीलोकमें; एधि=बड़े भारी सम्राट् बन जाओ; त्वा कामानाम्=(मैं) तुम्हें सम्पूर्ण भोगोंमेंसे; कामभाजम्=अति उत्तम भोगोंको भोगनेवाला; करोमि=बना देता हूँ॥ २४॥
व्याख्या—‘नचिकेता! यदि तुम प्रचुर धन-सम्पत्ति, दीर्घजीवनके लिये उपयोगी सुख-सामग्रियाँ अथवा और भी जितने भोग मनुष्य भोग सकता है, उन सबको मिलाकर उस आत्मतत्त्व-विषयक वरके समान समझते हो तो इन सबको माँग लो। तुम इस विशाल भूमिके सम्राट् बन जाओ। मैं तुम्हें समस्त भोगोंको इच्छानुसार भोगनेवाला बनाये देता हूँ।’ इस प्रकार यहाँ यमराजने वाक्चातुर्यसे आत्मतत्त्वका महत्त्व बढ़ाते हुए नचिकेताको विशाल भोगोंका प्रलोभन दिया॥ २४॥
सम्बन्ध—इतनेपर भी नचिकेता अपने निश्चयपर अटल रहा, तब स्वर्गके दैवी भोगोंका प्रलोभन देते हुए यमराजने कहा—