Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।16.3।। व्याख्या--'तेजः'--महापुरुषोंका सङ्ग मिलनेपर उनके प्रभावसे प्रभावित होकर साधारण पुरुष भी दुर्गुण-दुराचारोंका त्याग करके सद्गुण-सदाचारोंमें लग जाते …
Blog
BG 3.38 धूमेनाव्रियते वह्निर्
धूमेनाव्रियते वह्निर्यथादर्शो मलेन च ।यथोल्बेनावृतो गर्भस्तथा तेनेदमावृतम् ॥38॥ धूमेन, आव्रियते, वह्नि:, यथा, आदर्श:, मलेन, च,यथा, उल्बेन, आवृत:, गर्भ:, तथा, तेन, इदम्, आवृतम्॥ ३८॥ यथा = …
Bhagavad Gita 16.2
Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।16.2।। व्याख्या--'अहिंसा'--शरीर, मन, वाणी, भाव आदिके द्वारा किसीका भी किसी प्रकारसे अनिष्ट न करनेको तथा अनिष्ट न चाहनेको 'अहिंसा' कहते हैं। वास्तवमें …
Bhagavad Gita 16.1
Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।16.1।। व्याख्या--[पंद्रहवें अध्यायके उन्नीसवें श्लोकमें भगवान्ने कहा कि 'जो मुझे पुरुषोत्तम जान लेता है, वह सब प्रकारसे मेरा ही भजन करता है अर्थात् वह …
Ida Ansell – Ujjvala
American Lady devotee of Swami Vivekananda whose notes of his classes in Northern California, along with those of Mr. Rhodehamel, are the only records of Swamiji's lectures and classes in San …
Mrs. Roxie Blodgett
American devotee of Swamiji, resident of Los Angeles, had heard him speak at the Parliament of Religions at Chicago. Mrs. Blodgett had bought a large coloured poster of Swamiji at Chicago and hung it …