अथातः शौव उद्गीथस्तद्ध बको दाल्भ्यो ग्लावो वा मैत्रेयः स्वाध्यायमुद्वव्राज ॥ १.१२.१ ॥ athātaḥ śauva udgīthastaddha bako dālbhyo glāvo vā maitreyaḥ svādhyāyamudvavrāja || 1.12.1 || 1. Now, …
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Chandogya Upanishad 4.12.1
अथ हैनमन्वाहार्यपचनोऽनुशशासापो दिशो नक्षत्राणि चन्द्रमा इति य एष चन्द्रमसि पुरुषो दृश्यते सोऽहमस्मि स एवाहमस्मीति ॥ ४.१२.१ ॥ atha hainamanvāhāryapacano'nuśaśāsāpo diśo nakṣatrāṇi candramā iti ya …
Chandogya Upanishad 6.12.1
न्यग्रोधफलमत आहरेतीदं भगव इति भिन्द्धीति भिन्नं भगव इति किमत्र पश्यसीत्यण्व्य इवेमा धाना भगव इत्यासामङ्गैकां भिन्द्धीति भिन्ना भगव इति किमत्र पश्यसीति न किंचन भगव इति ॥ ६.१२.१ ॥ nyagrodhaphalamata …
Chandogya Upanishad 7.24.1
यत्र नान्यत्पश्यति नान्यच्छृणोति नान्यद्विजानाति स भूमाथ यत्रान्यत्पश्यत्यन्यच्छृणोत्यन्यद्विजानाति तदल्पं यो वै भूमा तदमृतमथ यदल्पं तन्मर्त्य्ं स भगवः कस्मिन्प्रतिष्ठित इति स्वे महिम्नि यदि वा न …
Bhagavad Gita 18.60
Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।18.60।। व्याख्या -- स्वभावजेन कौन्तेय निबद्धः स्वेन कर्मणा -- पूर्वजन्ममें जैसे कर्म और गुणोंकी वृत्तियाँ रही हैं? इस जन्ममें जैसे …
Bhagavad Gita 18.59
Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।18.59।। व्याख्या -- यदहंकारमाश्रित्य -- प्रकृतिसे ही महत्तत्त्व और महत्तत्त्वसे अहंकार पैदा हुआ है। उस अहंकारका ही एक विकृत अंश है …