अथ वायुमब्रुवन् वायवेतद् विजानीहि किमेतद् यक्षमिति तथेति॥ ७॥
अथ=तब; वायुम्=वायुदेवतासे; अब्रुवन्=(देवताओंने) कहा; वायो=हे वायुदेव! (जाकर); एतत्=इस बातको; विजानीहि=आप जानिये—इसका भलीभाँति पता लगाइये (कि); एतत्=यह; यक्षम्=दिव्य यक्ष; किम् इति=कौन है; (वायुने कहा) तथा इति=बहुत अच्छा!॥ ७॥
व्याख्या—जब अग्निदेव असफल होकर लौट आये, तब देवताओंने इस कार्यके लिये अप्रतिमशक्ति वायुदेवको चुना और उनसे कहा कि ‘वायुदेव! आप जाकर इस यक्षका पूरा पता लगाइये कि यह कौन है।’ वायुदेवको भी अपनी बुद्धि-शक्तिका गर्व था; अत: उन्होंने भी कहा—‘अच्छी बात है, अभी पता लगाता हूँ’॥ ७॥