तेऽग्निमब्रुवञ्जातवेद एतद् विजानीहि किमिदं यक्षमिति तथेति॥ ३॥ ते=उन इन्द्रादि देवताओंने; अग्निम्=अग्निदेवसे; [इति=इस प्रकार;] अब्रुवन्=कहा; जातवेद:=हे जातवेदा; (आप जाकर) एतत्=इस …
Kena Upanishad 3.2 Hindi
तद्धैषां विजज्ञौ तेभ्यो ह प्रादुर्बभूव तन्न व्यजानत किमिदं यक्षमिति॥ २॥ ह तत्=प्रसिद्ध है कि उस परब्रह्मने; एषाम्=इन देवताओंके (अभिमानको); विजज्ञौ=जान लिया; (और कृपापूर्वक उनका अभिमान …
Kena Upanishad 3.1 Hindi
सम्बन्ध—प्रथम प्रकरणमें ब्रह्मका स्वरूप-तत्त्व समझानेके लिये उसकी शक्तिका सांकेतिक भाषामें विभिन्न प्रकारसे दिग्दर्शन कराया गया। द्वितीय प्रकरणमें ब्रह्मज्ञानकी विलक्षणता बतलानेके लिये यह कहा गया कि …
Kena Upanishad 2.5 Hindi
इह चेदवेदीदथ सत्यमस्तिन चेदिहावेदीन्महती विनष्टि:।भूतेषु भूतेषु विचित्य धीरा:प्रेत्यास्माल्लोकादमृता भवन्ति॥ ५॥ चेत्=यदि; इह=इस मनुष्य-शरीरमें; अवेदीत्=(परब्रह्मको) जान लिया; अथ=तब …
Kena Upanishad 2.4 Hindi
प्रतिबोधविदितं मतममृतत्वं हि विन्दते।आत्मना विन्दते वीर्यं विद्यया विन्दतेऽमृतम्॥ ४॥ प्रतिबोधविदितम्=उपर्युक्त प्रतिबोध (संकेत) से उत्पन्न ज्ञान ही; मतम्=वास्तविक ज्ञान है; हि=क्योंकि …
Kena Upanishad 2.3 Hindi
यस्यामतं तस्य मतं मतं यस्य न वेद स:।अविज्ञातं विजानतां विज्ञातमविजानताम्॥ ३॥ यस्य अमतम्=जिसका यह मानना है कि ब्रह्म जाननेमें नहीं आता; तस्य=उसका; मतम्=(तो वह) जाना हुआ है; …