द्वा सुपर्णा सयुजा सखायासमानं वृक्षं परिषस्वजाते।तयोरन्य: पिप्पलं स्वाद्वत्त्य-नश्नन्नन्यो अभिचाकशीति॥ ६॥ * * यह मन्त्र अथर्ववेद काण्ड ९ सूक्त १४ का २० वाँ है तथा ऋग्वेद मण्डल १ सूक्त १६४ का २० वाँ …
Svetasvatara Upanishad 4.5 Hindi
अजामेकां लोहितशुक्लकृष्णांबह्वी: प्रजा: सृजमानां सरूपा:।अजो ह्येको जुषमाणोऽनुशेतेजहात्येनां भुक्तभोगामजोऽन्य:॥ ५॥ सरूपा:=अपने ही सदृश अर्थात् …
Svetasvatara Upanishad 4.4 Hindi
नील: पतङ्गो हरितो लोहिताक्ष-स्तडिद्गर्भ ऋतव: समुद्रा:।अनादिमत्त्वं विभुत्वेन वर्तसेयतो जातानि भुवनानि विश्वा॥ ४॥ [त्वम् एव]=तू ही; नील:=नीलवर्ण; पतङ्ग:=पतङ्ग है; हरित:=हरे रंगका; …
Svetasvatara Upanishad 4.3 Hindi
त्वं स्त्री त्वं पुमानसि त्वं कुमार उत वा कुमारी।त्वं जीर्णो दण्डेन वञ्चसि त्वं जातो भवसि विश्वतोमुख:॥ ३॥ * * यह अथर्ववेद काण्ड १० सूक्त ८ का २७ वाँ मन्त्र है। त्वम्=तू; स्त्री=स्त्री …
Svetasvatara Upanishad 4.2 Hindi
तदेवाग्निस्तदादित्यस्तद्वायुस्तदु चन्द्रमा:।तदेव शुक्रं तद्ब्रह्म तदापस्तत् प्रजापति:॥ २॥ * * यह मन्त्र यजुर्वेद ३२। १ में भी आया है। तत् एव=वही; अग्नि:=अग्नि है; तत् …
Svetasvatara Upanishad 4.1 Hindi
य एकोऽवर्णो बहुधा शक्तियोगाद्वर्णाननेकान् निहितार्थो दधाति।वि चैति चान्ते विश्वमादौ स देव:स नो बुद्धॺा शुभया संयुनक्तु॥ १॥ य:=जो; अवर्ण:=रंग, रूप आदिसे रहित होकर भी; निहितार्थ:=छिपे हुए …