न तत्र चक्षुर्गच्छति न वाग्गच्छति नो मनः ।न विद्मो न विजानीमो यथैतदनुशिष्यात् ॥ ३॥अन्यदेव तद्विदितादथो अविदितादधि ।इति शुश्रुम पूर्वेषां ये नस्तद्व्याचचक्षिरे ॥ ४॥ तत्र=वहाँ (उस ब्रह्मतक); न=न …
Kena Upanishad 1.2 Hindi
सम्बन्ध—इसके उत्तरमें गुरु कहते हैं— श्रोत्रस्य श्रोत्रं मनसो मनो यद्वाचो ह वाचॸ स उ प्राणस्य प्राण:।चक्षुषश्चक्षुरतिमुच्य धीरा:प्रेत्यास्माल्लोकादमृता भवन्ति॥ …
Kena Upanishad 1.1 Hindi
सम्बन्ध—शिष्य गुरुदेवसे पूछता है— ॐ केनेषितं पतति प्रेषितं मन:केन प्राण: प्रथम: प्रैति युक्त:।केनेषितां वाचमिमां वदन्तिचक्षु: श्रोत्रं क उ देवो युनक्ति॥ १॥ केन=किसके …
Mundaka Upanishad 1.2.11 Hindi
तप:श्रद्धे ये ह्युपवसन्त्यरण्येशान्ता विद्वांसो भैक्ष्यचर्यां चरन्त:।सूर्यद्वारेण ते विरजा: प्रयान्तियत्रामृत: स पुरुषो ह्यव्ययात्मा॥ ११॥ हि=किंतु; ये=जो; अरण्ये [स्थिता:]=वनमें …
Sri Ramakrishna on Attachment
আত্মপ্রকাশে অভয়-প্রদান
আত্মপ্রকাশে অভয়-প্রদান কাশীপুরের উদ্যানে আসিবার কয়েক দিন পরে ঠাকুর যেরূপে একদিন নিজ কক্ষ হইতে বহির্গত হইয়া উদ্যানপথে অল্পক্ষণের জন্য পাদচারণ করিয়াছিলেন, তাহা আমরা পাঠককে ইতিপূর্বে বলিয়াছি। …