Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।8.28।। व्याख्या--'वेदेषु यज्ञेषु तपःसु ৷৷. स्थानमुपैति चाद्यम्'--यज्ञ, दान, तप, तीर्थ, व्रत आदि जितने भी शास्त्रीय उत्तम-से-उत्तम कार्य हैं और उनका जो फल …
Bhagavad Gita 8.27
Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।8.27।। व्याख्या--'नैते सृती पार्थ जानन्योगी मुह्यति कश्चन'--शुक्लमार्ग प्रकाशमय है और कृष्णमार्ग अन्धकारमय है। जिनके अन्तःकरणमें उत्पत्ति-विनाशशील …
Bhagavad Gita 8.26
Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।8.26।। व्याख्या--'शुक्लकृष्णे गती ह्येते जगतः शाश्वते मते'--शुक्ल और कृष्ण--इन दोनों मार्गोंका सम्बन्ध जगत्के सभी चर-अचर प्राणियोंके साथ है। तात्पर्य है …
Bhagavad Gita 8.25
Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।8.25।। व्याख्या--'धूमो रात्रिस्तथा कृष्णः ৷৷. प्राप्य निवर्तते'--देश और कालकी दृष्टिसे जितना अधिकार अग्नि अर्थात् प्रकाशके देवताका है, उतना ही अधिकार धूम …
Bhgavad Gita Kannada
Chapter 1 Chapter 3 Chapter 14 Chapter 15 Chapter 16 Chapter 17 Chapter 18 …
BG 2.1 ತಂ ತಥಾ ಕೃಪಯಾವಿಷ್ಟ
ಸಂಜಯ ಉವಾಚತಂ ತಥಾ ಕೃಪಯಾವಿಷ್ಟಮಶ್ರುಪೂರ್ಣಾಕುಲೇಕ್ಷಣಮ್ ।ವಿಷೀದಂತಮಿದಂ ವಾಕ್ಯಮುವಾಚ ಮಧುಸೂದನಃ ॥ ಸಂಜಯನು ಹೇಳಿದನು - ಹೀಗೆ ಕರುಣೆಯಿಂದ ವ್ಯಾಪ್ತನಾದ ಕಂಬನಿತುಂಬಿ ವ್ಯಾಕುಲ ಕಣ್ಣುಗಳುಳ್ಳವನಾದ, ಶೋಕಿಸುತ್ತಿರುವ ಅರ್ಜುನನಲ್ಲಿ …