Thus ends the Moha Mudgara (Hammer of Delusion – Another name for Bhaja Govindam) …
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कर्मयोग का आदर्श – स्वामी विवेकानंद
वेदान्त का सब से उदात्त तत्व यह है कि हम एक ही लक्ष्य पर भिन्न भिन्न मार्गों से पहुँच सकते हैं। मैंने इन्हें साधारण रूप से चार मार्गों में विभाजित किया है और वे हैं–कर्ममार्ग, भक्तिमार्ग, योगमार्ग और …
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मुक्ति – स्वामी विवेकानंद
हम पहले कह चुके हैं कि ‘कर्म’ शब्द ‘कार्य’ के अतिरिक्त कार्य-कारण भाव को भी सूचित करता है। कोई कार्य, कोई विचार, जो फल उत्पन्न करता है, ‘कर्म’ कहलाता है, इसलिए ‘कर्मविधान’ का अर्थ है कार्य-कारण …
अनासक्ति ही पूर्ण आत्मत्याग है – स्वामी विवेकानंद
जिस प्रकार हमारे शरीर, मन और वचन द्वारा किया हुआ प्रत्येक कार्य हमारे पास फल के रूप में फिर से वापस आ जाता है, उसी प्रकार हमारे कार्य दूसरे व्यक्तियों पर तथा उनके कार्य हमारे ऊपर अपना प्रभाव डाल सकते …
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परोपकार में हमारा ही उपकार है – स्वामी विवेकानंद
यह विचार करने के पहले कि कर्तव्य-निष्ठा हमें आध्यात्मिक उन्नति में किस प्रकार सहायता पहुँचाती है, मैं आप लोगों को संक्षेप में यह भी बता देना चाहता हूँ कि भारतवर्ष में जिसे हम कर्म कहते हैं, उसका एक …
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