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BG 2.1 ತಂ ತಥಾ ಕೃಪಯಾವಿಷ್ಟ
ಸಂಜಯ ಉವಾಚತಂ ತಥಾ ಕೃಪಯಾವಿಷ್ಟಮಶ್ರುಪೂರ್ಣಾಕುಲೇಕ್ಷಣಮ್ ।ವಿಷೀದಂತಮಿದಂ ವಾಕ್ಯಮುವಾಚ ಮಧುಸೂದನಃ ॥ ಸಂಜಯನು ಹೇಳಿದನು - ಹೀಗೆ ಕರುಣೆಯಿಂದ ವ್ಯಾಪ್ತನಾದ ಕಂಬನಿತುಂಬಿ ವ್ಯಾಕುಲ ಕಣ್ಣುಗಳುಳ್ಳವನಾದ, ಶೋಕಿಸುತ್ತಿರುವ ಅರ್ಜುನನಲ್ಲಿ …
Bhagavad Gita 8.24
Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।8.24।। व्याख्या--'अग्निर्ज्योतिरहः शुक्लः षण्मासा उत्तरायणम्'--इस भूमण्डलपर शुक्लमार्गमें सबसे पहले अग्निदेवताका अधिकार रहता है। अग्नि रात्रिमें प्रकाश …
Bhagavad Gita 8.23
Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।8.23।। व्याख्या --[जीवित अवस्थामें ही बन्धनसे छूटनेको 'सद्योमुक्ति' कहते हैं अर्थात् जिनको यहाँ ही भगवत्प्राप्ति हो गयी, भगवान्में अनन्यभक्ति हो गयी, …
Bhagavad Gita 8.22
Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।8.22।। व्याख्या--'यस्यान्तःस्थानि भूतानि येन सर्वमिदं ततम्'--सातवें अध्यायके बारहवें श्लोकमें भगवान्ने निषेधरूपसे कहा कि सात्त्विक, राजस और तामस भाव …
Bhagavad Gita 8.21
Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।8.21।। व्याख्या--'अव्यक्तोऽक्षर ৷৷. तद्धाम परमं मम'--भगवान्ने सातवें अध्यायके अट्ठाईसवें, उन्तीसवें और तीसवें श्लोकमें जिसको 'माम्', कहा है तथा …