Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।15.13।। व्याख्या -- गामाविश्य च भूतानि धारयाम्यहमोजसा -- भगवान् ही पृथ्वीमें प्रवेश करके उसपर स्थित सम्पूर्ण स्थावरजङ्गम …
Bhagavad Gita 15.12
Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।15.12।। व्याख्या -- [प्रभाव और महत्त्वकी ओर आकर्षित होना जीवका स्वभाव है। प्राकृत पदार्थोंके सम्बन्धसे जीव प्राकृत पदार्थोंके प्रभावसे …
Bhagavad Gita 15.11
Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।15.11।। व्याख्या -- यतन्तो योगिनश्चैनं पश्यन्ति -- यहाँ योगिनः पद उन सांख्ययोगी साधकोंका वाचक है? जिनका एकमात्र उद्देश्य …
BG 2.54 स्थितप्रज्ञस्य का भाषा
अर्जुन उवाच ।स्थितप्रज्ञस्य का भाषा समाधिस्थस्य केशव ।स्थितधीः किं प्रभाषेत किमासीत व्रजेत किम् ॥54॥ स्थितप्रज्ञस्य, का, भाषा, समाधिस्थस्य, केशव,स्थितधी:, किम्, प्रभाषेत, किम्, आसीत, व्रजेत, …
Bhagavad Gita 15.10
Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।15.10।। व्याख्या -- उत्क्रामन्तम् -- स्थूलशरीरको छोड़ते समय जीव सूक्ष्म और कारणशरीरको साथ लेकर प्रस्थान करता है। इसी क्रियाको …
BG 2.69 या निशा सर्वभूतानां
या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी ।यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुनेः ॥69॥ या, निशा, सर्वभूतानाम्, तस्याम्, जागर्ति, संयमी,यस्याम्, जाग्रति, भूतानि, सा, निशा, पश्यत:, मुने:॥ …