मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः ।आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत ॥ २-१४॥ मात्रास्पर्शा:, तु, कौन्तेय, शीतोष्णसुखदु:खदा:,आगमापायिन:, अनित्या:, तान्, तितिक्षस्व, भारत॥ …
Bhagavad Gita 15.18
Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।15.18।। व्याख्या -- यस्मात्क्षरमतीतोऽहम् -- इन पदोंमें भगवान्का यह भाव है कि क्षर (प्रकृति) प्रतिक्षण परिवर्तनशील है और मैं …
Bhagavad Gita 15.17
Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।15.17।। व्याख्या -- उत्तमः पुरुषस्त्वन्यः -- पूर्वश्लोकमें क्षर और अक्षर दो प्रकारके पुरुषोंका वर्णन करनेके बाद अब भगवान् यह बताते …
Bhagavad Gita 15.16
Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।15.16।। व्याख्या -- द्वाविमौ पुरुषौ लोके क्षरश्चाक्षर एव च -- यहाँ लोके पदको सम्पूर्ण संसारका वाचक समझना चाहिये। इसी …
Bhagavad Gita 15.15
Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।15.15।। व्याख्या -- सर्वस्य चाहं हृदि संनिविष्टः (टिप्पणी प0 776) -- पीछेके श्लोकोंमें अपनी विभूतियोंका वर्णन करनेके बाद …
Bhagavad Gita 15.14
Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।15.14।। व्याख्या -- अहं वैश्वानरो भूत्वा प्राणिनां देहमाश्रितः -- बारहवें श्लोकमें अग्निकी प्रकाशनशक्तिमें अपने प्रभावका वर्णन …