Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।8.1।। व्याख्या--'पुरुषोत्तम किं तद्ब्रह्म'-- हे पुरुषोत्तम वह ब्रह्म क्या है अर्थात् ब्रह्म शब्दसे क्या समझना …
Bhagavad Gita, Chapter 8
BG 1.23 యోత్స్యమానానవేక్షేఽహం
యోత్స్యమానానవేక్షేఽహం య ఏతేఽత్ర సమాగతాః । ధార్తరాష్ట్రస్య దుర్బుద్ధేః యుద్ధే ప్రియచికీర్షవః ॥ 23 యోత్స్యమానాన్, అవేక్షే, అహమ్, యే, ఏతే, అత్ర, సమాగతాః, ధార్తరాష్ట్రస్య, దుర్బుద్ధేః, యుద్ధే, …
Bhagavad Gita 7.30
Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।7.30।। व्याख्या--'साधिभूताधिदैवं मां साधियज्ञं च ये विदुः'--[पूर्वश्लोकमें निर्गुणनिराकारको जाननेका वर्णन करके अब सगुणसाकारको जाननेकी बात कहते हैं।]यहाँ …
Bhagavad Gita 7.29
Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।7.29।। व्याख्या--'जरामरणमोक्षाय मामाश्रित्य यतन्ति ये'--यहाँ जरा (वृद्धावस्था) और मरणसे मुक्ति पानेका तात्पर्य यह नहीं है कि ब्रह्म अध्यात्म और कर्मका …
Bhagavad Gita 7.28
Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।7.28।। व्याख्या--'येषां त्वन्तगतं पापं जनानां पुण्यकर्मणाम्' द्वन्द्वमोहसे'--मोहित मनुष्य तो भजन नहीं करते और जो द्वन्द्वमोहसे मोहित नहीं हैं …